फलोदी के खींचन में शीतकालीन प्रवास पर पहुंची डेमोसाइल क्रेन (कुरजां) में खतरनाक एच 5 एन 1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस की पुष्टि के बाद चिकित्सा विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग ने आमजन को इन पक्षियों के ठहरने वाले स्थानों और तालाबों के आसपास न जाने की सख्त हिदायत दी है। वायरस के प्रसार को रोकने और जनसुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने खीचन में व्यापक जांच अभियान चलाया।
जांच और सतर्कता अभियान
15 से 20 दिसंबर के दौरान बीमार हुई डेमोसाइल क्रेन को रेस्क्यू कर उपचार दिया गया था। इस दौरान संपर्क में आए पक्षी प्रेमियों, वनकर्मियों और पशु चिकित्सकीय टीम के 17 सदस्यों के सैंपल भी लिए गए।
भोपाल और जोधपुर की विशेषज्ञ टीम ने कुरजां के पड़ाव स्थलों से पक्षियों की बीट और तालाबों के पानी के सैंपल इकट्ठा किए। टीम ने तीन घंटे तक तालाब पर रहकर कुरजां की गतिविधियों का गहन निरीक्षण भी किया।
डॉ. धीरज बिस्सा (सीएमएचओ, फलोदी) ने बताया कि एच 5 एन 1 की पुष्टि के बाद सतर्कता के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। सभी चिकित्सा संस्थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है, और आमजन को सर्दी-जुकाम के लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी गई है।
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आमजन के लिए एडवाइजरी
कुरजां के पड़ाव स्थलों और तालाबों के पास न जाएं।
यदि पहले से वहां भ्रमण किया है और सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी चिकित्सा संस्थान से संपर्क करें।
किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए कंट्रोल रूम नंबर 02925-299110 पर संपर्क करें।
संक्रमण से बचाव के उपाय
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें।
संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
किसी भी बीमार पक्षी के संपर्क में आने से बचें।
हर गतिविधि पर नजर
चिकित्सा विभाग और विशेषज्ञों की टीम ने खतरनाक वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी है। बीमार और मृत पक्षियों के संपर्क में आए लोगों के स्वास्थ्य की भी निगरानी की जा रही है।
बर्ड फ्लू का खतरा क्यों गंभीर है?
एच 5 एन 1 एवियन इन्फ्लूएंजा एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जो पक्षियों से इंसानों में फैल सकता है। इसकी वजह से सांस संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। समय पर सतर्कता और सावधानी बरतने से इस संक्रमण के प्रसार को रोका जा सकता है।
जनहित में अपील
राजस्थान में बर्ड फ्लू के इस खतरे को देखते हुए आमजन से अपील है कि वे चिकित्सा विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और सतर्क रहें। आपकी सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।
सौजन्य: राजस्थान पत्रिका
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